JPSC Protest Ranchi: झारखंड की राजधानी रांची में सरकारी नौकरी की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों का आंदोलन लगातार बड़ा होता जा रहा है। 14वीं JPSC Protest Ranchi संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ विरोध अब केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहा। प्रदर्शनकारी JPSC Protest Ranchi के साथ JSSC समेत राज्य की भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग उठा रहे हैं।
इस आंदोलन का प्रमुख चेहरा छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो बनकर सामने आए हैं। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलन के दौरान उन्होंने अनशन भी शुरू किया। छात्रों की प्रमुख मांग है कि 14वीं JPSC PT को रद्द किया जाए और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
JPSC Protest Ranchi ने हाल के दिनों में कई छात्रों को एकजुट किया है, जो शिक्षा प्रणाली में सुधार की मांग कर रहे हैं।
इसलिए JPSC Protest Ranchi के कारण छात्रों ने एकजुट होकर आवाज उठाई है।
- JPSC Protest Ranchi का मुख्य उद्देश्य सभी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता लाना है।
- इस आंदोलन की शुरुआत JPSC Protest Ranchi से ही हुई थी।
- छात्रों ने JPSC Protest Ranchi का समर्थन करते हुए सभी अनियमितताओं का खुलासा करने की मांग की है।
- JPSC Protest Ranchi के माध्यम से छात्रों ने एकजुट होकर विरोध किया है।
- JPSC Protest Ranchi ने सभी को एकत्रित किया है, ताकि उनकी मांगें सुनाई जा सकें।
- JPSC Protest Ranchi की वजह से छात्र समुदाय में गहरी चिंताएं हैं।
- JPSC Protest Ranchi ने छात्रों को उनकी आवाज उठाने के लिए प्रेरित किया है।
- छात्रों का आंदोलन JPSC Protest Ranchi का हिस्सा है, जो गंभीर मुद्दों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
- JPSC Protest Ranchi के चलते कई प्रमुख छात्र नेता उभरकर सामने आए हैं।
- जैसे-जैसे JPSC Protest Ranchi बढ़ा, छात्रों ने अपनी आवाज को और बुलंद किया।
- यह आंदोलन JPSC Protest Ranchi ने छात्रों के अधिकारों को सुरक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- JPSC Protest Ranchi ने छात्रों को एकजुट करने का कार्य किया है।
- छात्रों की एकजुटता JPSC Protest Ranchi में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है।
- JPSC Protest Ranchi ने सभी छात्रों को एकजुट किया है।
- JPSC Protest Ranchi के चलते छात्र समुदाय में एक नई जागरूकता आई है।
- छात्रों के अधिकारों के लिए JPSC Protest Ranchi एक महत्वपूर्ण कदम है।
- JPSC Protest Ranchi के कारण शिक्षा प्रणाली में सुधार की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
- छात्रों ने JPSC Protest Ranchi के जरिए निरंतरता बनाए रखने का प्रयास किया है।
- JPSC Protest Ranchi ने छात्रों को एकजुट होकर अपनी मांगों को उठाने का मौका दिया है।
- यह आंदोलन JPSC Protest Ranchi का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है।
- JPSC Protest Ranchi के माध्यम से छात्रों ने सरकारी भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग की है।
- JPSC Protest Ranchi ने छात्रों को एकजुट रखने का कार्य किया है।
- छात्रों का आंदोलन, JPSC Protest Ranchi, एक गंभीर मुद्दा बन चुका है।
- JPSC Protest Ranchi के कारण छात्र समुदाय में जागरूकता बढ़ी है।
- JPSC Protest Ranchi की गूंज अब पूरे झारखंड में सुनाई दे रही है।
- छात्रों ने JPSC Protest Ranchi के माध्यम से अपनी आवाज को और मजबूत किया है।
- JPSC Protest Ranchi की आवश्यकता को अब और अधिक समझा जा रहा है।
- JPSC Protest Ranchi के चलते छात्रों ने एक नई दिशा में कदम बढ़ाया है।
- JPSC Protest Ranchi एक महत्वपूर्ण मोड़ बन चुका है।
- JPSC Protest Ranchi अब एक आंदोलन बन चुका है।
- JPSC Protest Ranchi ने सभी छात्रों को संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया है।
- JPSC Protest Ranchi ने नई ऊर्जा के साथ छात्रों का समर्थन किया है।
- JPSC Protest Ranchi का उद्देश्य छात्रों की आवाज को बुलंद करना है।
- JPSC Protest Ranchi ने सभी को एकजुट किया है।
- JPSC Protest Ranchi अब एक बड़ा आंदोलन बन चुका है।
मामला इसलिए भी गंभीर हो गया क्योंकि जांच सिर्फ आरोपों तक सीमित नहीं रही। CID ने JPSC कार्यालय और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े ठिकानों पर कार्रवाई की, कई लोगों की गिरफ्तारी हुई और तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते (L. Khiangte) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद JPSC Mains परीक्षा भी स्थगित कर दी गई।
आखिर JPSC Protest Ranchi शुरू कहां से हुआ?
14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा 19 अप्रैल 2026 को आयोजित हुई थी। झारखंड की प्रशासनिक सेवाओं में भर्ती के लिए होने वाली इस परीक्षा को लेकर विवाद उस समय बढ़ा, जब 2 जुलाई को प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी किया गया।
103 पदों के लिए करीब 2,204 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया था। नतीजे सामने आने के कुछ ही समय बाद कई अभ्यर्थियों ने परीक्षा और परिणाम जारी करने की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
अभ्यर्थियों की प्रमुख आपत्तियों में श्रेणीवार कटऑफ तत्काल सार्वजनिक नहीं किया जाना और जारी मेरिट/रिजल्ट दस्तावेज पर आयोग के संवैधानिक सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं होने जैसे मुद्दे शामिल थे। इन सवालों को लेकर अभ्यर्थियों ने आयोग से स्थिति स्पष्ट करने और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की।
शुरुआत में परीक्षा परिणाम और प्रक्रिया पर सवालों तक सीमित रहा यह मामला धीरे-धीरे विरोध प्रदर्शन में बदल गया। इसके बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थी अपनी मांगों को लेकर सामने आने लगे और यही विरोध आगे चलकर एक बड़े छात्र आंदोलन का रूप लेने लगा।
14 जुलाई को रांची में दिखा बड़ा विरोध
14 जुलाई को विरोध ने और बड़ा रूप ले लिया। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी AJSU Students’ Union के बैनर तले रांची की सड़कों पर उतरे। छात्रों ने बापू वाटिका से JPSC मुख्यालय तक मार्च किया और आयोग के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन कर अपनी मांगें रखीं।
प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों ने परिणाम जारी करने के समय और पूरी प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए। उनका आरोप था कि रिजल्ट देर रात जारी किया गया, जिससे संदेह और बढ़ा। छात्रों ने श्रेणीवार कटऑफ सार्वजनिक करने, रिजल्ट की जांच कराने और जिस रात परिणाम जारी हुआ उस दौरान JPSC परिसर के CCTV फुटेज की जांच की मांग भी की।
इस प्रदर्शन के बाद आंदोलन की मांगें और स्पष्ट होती गईं। छात्र 14वीं JPSC PT के परिणाम को रद्द करने के साथ पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग करने लगे। यहीं से परीक्षा परिणाम को लेकर शुरू हुआ विरोध बड़े छात्र आंदोलन की ओर बढ़ता दिखाई दिया।
CID की Entry के बाद मामला और गंभीर हुआ
छात्रों और विभिन्न संगठनों की ओर से लगातार उठाए जा रहे सवालों के बीच मामला जांच एजेंसियों तक पहुंच गया। CID और रांची पुलिस की टीम ने JPSC कार्यालय समेत परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की। इस दौरान दस्तावेजों, कंप्यूटर रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की जांच शुरू की गई।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, इसका दायरा भी बढ़ता गया। परीक्षा के आयोजन से लेकर रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया, डिजिटल डेटा के प्रबंधन और परीक्षा से जुड़ी निजी एजेंसी की भूमिका तक कई पहलुओं को जांच के दायरे में लिया गया।
इसके बाद यह मामला केवल छात्रों के आरोपों और आयोग के जवाब तक सीमित नहीं रहा। परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं की आपराधिक जांच शुरू होने के साथ ही 14वीं JPSC PT का विवाद एक नए और गंभीर चरण में पहुंच गया।
JPSC की Deputy Examination Controller भी गिरफ्तार
जांच में सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब CID ने JPSC की तत्कालीन डिप्टी एग्जामिनेशन कंट्रोलर श्वेता गुप्ता समेत परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कई लोगों को गिरफ्तार किया। इसके साथ ही परीक्षा के संचालन और डेटा प्रोसेसिंग से जुड़ी एजेंसी के कुछ लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, गिरफ्तार लोगों की संख्या भी बढ़ती गई। अगस्त की शुरुआत तक इस मामले में एक दर्जन से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की खबर सामने आ चुकी थी।
इन गिरफ्तारियों के बाद मामला सिर्फ छात्रों के विरोध और परीक्षा परिणाम पर उठ रहे सवालों तक सीमित नहीं रहा। जांच का दायरा बढ़ने के साथ परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता और जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल तेज हो गए। यही वजह है कि छात्र अब पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के साथ 14वीं JPSC PT को रद्द करने की मांग पर अड़े हुए हैं।छात्र अब सिर्फ departmental inquiry से संतुष्ट नहीं हैं। आंदोलनकारी पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।
करीब 1000 अभ्यर्थियों ने CID को भेजीं OMR Sheet की Copies
जांच का एक अहम हिस्सा अभ्यर्थियों की OMR शीट भी बनी हुई है। 14वीं JPSC PT में सफल हुए करीब एक हजार अभ्यर्थियों ने अपनी OMR शीट की कॉपी CID को भेजी है। अब जांच के दौरान इन कॉपियों का आयोग के पास मौजूद मूल रिकॉर्ड और संबंधित डेटा से मिलान किया जा सकता है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि परीक्षा प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी हुई थी या नहीं।
खास तौर पर OMR शीट और डिजिटल डेटा से जुड़े सवाल इस पूरे विवाद के सबसे संवेदनशील पहलुओं में शामिल हैं। छात्रों की ओर से भी लगातार इन रिकॉर्ड की जांच और पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की जा रही है।
हालांकि, इस मामले में यह समझना जरूरी है कि CID की जांच अभी जारी है। छात्रों, अभ्यर्थियों और राजनीतिक दलों की ओर से कई आरोप लगाए गए हैं, लेकिन जांच पूरी होने से पहले सभी आरोपों को सही या सिद्ध मान लेना उचित नहीं होगा। जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित अनियमितताएं किस स्तर तक हुईं और इसके लिए कौन जिम्मेदार था।
JPSC अध्यक्ष L. Khiangte ने दिया इस्तीफा
इस पूरे विवाद के बीच JPSC में एक और बड़ा घटनाक्रम सामने आया। आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। झारखंड के पूर्व मुख्य सचिव रहे खियांग्ते 1988 बैच के सेवानिवृत्त IAS अधिकारी हैं।
इस्तीफे के बाद CID ने उनसे भी मामले को लेकर पूछताछ की। 28 जुलाई को उनसे कई घंटों तक सवाल-जवाब किए गए और आगे की पूछताछ के लिए भी बुलाया गया।
बाद में खियांग्ते ने अपने इस्तीफे को लेकर कहा कि उन्होंने निष्पक्ष जांच का रास्ता साफ रखने के लिए स्वेच्छा से पद छोड़ा है। उनका कहना था कि पद पर बने रहने की स्थिति में जांच या साक्ष्यों को प्रभावित करने जैसे सवाल उठ सकते थे, इसलिए उन्होंने पद छोड़ना उचित समझा।
JPSC अध्यक्ष का इस्तीफा इस पूरे विवाद में एक अहम घटनाक्रम माना जा रहा है। इसके बाद परीक्षा से जुड़े आरोपों, जांच और आयोग की भूमिका को लेकर चल रही चर्चा और तेज हो गई।
JPSC Mains परीक्षा भी हुई स्थगित
विवाद बढ़ने और मामले की CID जांच शुरू होने के बीच JPSC को मुख्य परीक्षा भी स्थगित करनी पड़ी। 14वीं संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा 25 से 27 जुलाई के बीच आयोजित होनी थी, लेकिन आयोग ने “अपरिहार्य परिस्थितियों” का हवाला देते हुए इसे फिलहाल टाल दिया।
मुख्य परीक्षा स्थगित होने का असर उन अभ्यर्थियों पर भी पड़ा, जिन्होंने प्रारंभिक परीक्षा पास कर ली थी और लंबे समय से इसकी तैयारी में जुटे थे। परीक्षा टलने से अब उन्हें नई तारीख का इंतजार करना पड़ रहा है।
दूसरी ओर, आंदोलन कर रहे छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले प्रारंभिक परीक्षा से जुड़े विवाद और उठाए गए सवालों का समाधान होना चाहिए। उनकी मांग है कि कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच पूरी होने और स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही आगे की परीक्षा प्रक्रिया शुरू की जाए।
अब जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम आंदोलन का केंद्र
जुलाई के आखिर तक यह आंदोलन और तेज हो गया। रांची का जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम आंदोलनकारी छात्रों और अभ्यर्थियों का प्रमुख केंद्र बन गया, जहां बड़ी संख्या में लोग जुटने लगे। इस दौरान सिर्फ 14वीं JPSC PT ही नहीं, बल्कि दूसरी भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर भी सवाल उठाए गए।
आंदोलन में सबसे ज्यादा चर्चा देवेंद्र नाथ महतो की रही। छात्र और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर पहले भी सक्रिय रहे महतो इस आंदोलन में प्रमुख चेहरों में शामिल हैं। उन्होंने छात्रों की मांगों को लेकर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया और सरकार से इस मामले में ठोस कदम उठाने की मांग की।
महतो की प्रमुख मांगों में 14वीं JPSC PT को रद्द करना, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराना और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शामिल है। अनशन के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद उन्होंने पानी पीकर अनशन खत्म किया, लेकिन साफ किया कि छात्रों की मांगों को लेकर आंदोलन जारी रहेगा।
कौन हैं देवेंद्र नाथ महतो?
देवेंद्र नाथ महतो झारखंड में छात्र हितों, प्रतियोगी परीक्षाओं और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। JPSC से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर भी वह पहले आवाज उठाते रहे हैं। मौजूदा आंदोलन में वह छात्रों के प्रमुख प्रतिनिधियों में शामिल हैं और आंदोलन के सबसे सक्रिय व दिखाई देने वाले चेहरों में से एक बनकर सामने आए हैं।
आंदोलन के दौरान देवेंद्र नाथ महतो ने रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनशन शुरू किया। उनकी प्रमुख मांगों में 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा (PT) को रद्द करना, भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराना तथा जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना शामिल है।
अनशन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने लगी, जिसके बाद उन्होंने पानी ग्रहण कर अनशन समाप्त किया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि अनशन समाप्त होने का अर्थ आंदोलन की समाप्ति नहीं है और छात्रों की मांगों को लेकर उनका संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।
छात्रों की मुख्य मांग क्या है?
इस आंदोलन को आसान भाषा में समझें तो छात्रों की मांग केवल “result बदलने” की नहीं है। बल्कि आंदोलनकारी मुख्य रूप से 14वीं JPSC Preliminary Examination को रद्द करने, पूरे मामले की स्वतंत्र/CBI जांच कराने, कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करने और JPSC-JSSC की भविष्य की recruitment examinations को ज्यादा transparent बनाने की मांग कर रहे हैं।
यानी आंदोलन अब एक परीक्षा से आगे बढ़कर झारखंड की सरकारी भर्ती व्यवस्था में भरोसे का मुद्दा बन गया है।
राजनीति भी हुई तेज
JPSC विवाद के बाद झारखंड की राजनीति भी गर्म हो गई है। इसकी का फ़ायदा उठाते हुए विपक्ष राजनितिक पार्टिया BJP और Bharatiya Janata Yuva Morcha ने JPSC office के बाहर प्रदर्शन किया और 14वीं JPSC PT रद्द करने तथा CBI जांच की मांग उठाई। कारण BJP के Jharkhand प्रदेश अध्यक्ष और Rajya Sabha MP Aditya Sahu तथा BJYM प्रदेश अध्यक्ष Shashank Raj भी विरोध प्रदर्शन में शामिल रहे।
दूसरी तरफ राज्य सरकार ने CID investigation का हवाला दिया है। और झारखण्ड के मुख्यमंत्री Shree Hemant Soren ने कहा है कि सरकार छात्रों की चिंताओं और परीक्षा विवाद को गंभीरता से ले रही है तथा संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत न्याय सुनिश्चित करने की कोशिश की जाएगी।
इसलिए आने वाले दिनों में यह मामला केवल education और recruitment issue ही नहीं, बल्कि Jharkhand की politics का भी बड़ा मुद्दा बना रह सकता है।
5 अगस्त तक क्या स्थिति है?
5 अगस्त 2026 तक छात्र आंदोलन दूसरे सप्ताह में पहुंच चुका है और दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसलिए CID की जांच जारी है। गिरफ्तारियों की संख्या बढ़ी है, OMR records की जांच की जा रही है और पूर्व JPSC Chairman से भी पूछताछ हो चुकी है।
दूसरी तरफ छात्र अपना आंदोलन खत्म करने के मूड में नहीं दिख रहे। और साथ ही वो आंदोलनकारी अब आगे बड़े कार्यक्रमों की तैयारी कर रहे हैं। Tiranga March और Jharkhand Assembly के घेराव जैसी रणनीतियां भी सामने आई हैं।
पूरा मामला एक नजर में
14वीं JPSC विवाद: अब तक की पूरी टाइमलाइन
19 अप्रैल 2026: 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा आयोजित की गई।
2 जुलाई 2026: प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी हुआ। 103 पदों के लिए करीब 2,204 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा के लिए शॉर्टलिस्ट किया गया। नतीजे सामने आने के बाद कटऑफ, रिजल्ट जारी करने की प्रक्रिया और पारदर्शिता को लेकर अभ्यर्थियों ने सवाल उठाने शुरू किए।
14 जुलाई: विरोध तेज हुआ। AJSU Students’ Union के बैनर तले बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने रांची में बापू वाटिका से JPSC मुख्यालय तक मार्च किया और आयोग के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।
21 से 24 जुलाई के आसपास: मामला जांच एजेंसियों तक पहुंचा। CID और रांची पुलिस की कार्रवाई तेज हुई और JPSC कार्यालय समेत परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की गई। दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच भी शुरू हुई।
इसके बाद: जांच आगे बढ़ने के साथ JPSC की तत्कालीन डिप्टी एग्जामिनेशन कंट्रोलर समेत परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े कई लोगों की गिरफ्तारी हुई। परीक्षा से जुड़ी निजी एजेंसी के कुछ लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई।
JPSC अध्यक्ष का इस्तीफा: विवाद और जांच के बीच तत्कालीन JPSC अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद CID ने उनसे भी मामले को लेकर पूछताछ की।
25 से 27 जुलाई: इन तारीखों के बीच प्रस्तावित 14वीं JPSC संयुक्त सिविल सेवा मुख्य परीक्षा को स्थगित कर दिया गया। आयोग ने इसके पीछे “अपरिहार्य परिस्थितियों” का हवाला दिया।
जुलाई के आखिर से अगस्त की शुरुआत: रांची का जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम छात्र आंदोलन का प्रमुख केंद्र बन गया। यहां बड़ी संख्या में अभ्यर्थी जुटने लगे। देवेंद्र नाथ महतो आंदोलन के प्रमुख चेहरों में सामने आए और छात्रों की मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन शुरू किया।
5 अगस्त 2026: आंदोलन दूसरे सप्ताह में पहुंच गया। छात्र 14वीं JPSC PT को रद्द करने, कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग पर कायम हैं। CID की जांच भी जारी है।













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