रांची, 20 अगस्त 2026: झारखंड में सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद में गुरुवार को बड़ा मोड़ आया। JPSC-JSSC परीक्षा रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ चल रही कानूनी लड़ाई में झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं JPSC Civil Services परीक्षा और उससे हुई नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी। कोर्ट के इस आदेश से परीक्षा पास कर सरकारी नौकरी में नियुक्त हुए अभ्यर्थियों को फिलहाल राहत मिली है।
मामले की सुनवाई रांची स्थित झारखंड हाईकोर्ट में हुई। सुनवाई जस्टिस दीपक रोशन की अदालत में हुई। अदालत ने चयनित अभ्यर्थियों की ओर से दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सरकार के आदेश पर फिलहाल रोक लगाई है।
हाईकोर्ट ने सिर्फ परीक्षा रद्द करने के फैसले पर ही रोक नहीं लगाई, बल्कि उन नियुक्तियों को रद्द करने वाले सरकारी आदेश पर भी रोक लगा दी है। अदालत ने प्रभावित कर्मचारियों को अपनी ड्यूटी फिर से शुरू करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त 2026 को होने की बात याचिकाकर्ताओं के वकील ने बताई है।
JPSC-JSSC परीक्षा रद्द मामले में 342 चयनित अभ्यर्थी पहुंचे थे हाईकोर्ट
11वीं से 13वीं JPSC Civil Services परीक्षा से चयनित करीब 342 अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इन अभ्यर्थियों का कहना था कि परीक्षा में अगर किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन सभी चयनित उम्मीदवारों को एक साथ दोषी मानकर उनकी नौकरी खत्म करना सही नहीं है।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत में यह भी कहा कि सरकार की ओर से परीक्षा और नियुक्तियां रद्द करने से पहले ऐसा कोई ठोस तथ्य या सबूत सामने नहीं रखा गया, जिससे यह साबित हो कि सभी चयनित अभ्यर्थी किसी गड़बड़ी में शामिल थे।
उनकी दलील थी कि अगर किसी खास चरण में गड़बड़ी हुई है तो उस हिस्से की जांच करके संबंधित लोगों की भूमिका तय की जानी चाहिए। सभी सफल अभ्यर्थियों पर एक साथ कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
सरकार ने क्यों रद्द की थी परीक्षाएं?
यह पूरा मामला झारखंड में चल रहे भर्ती परीक्षा विवाद से जुड़ा है। 25 जुलाई से रांची में छात्रों का आंदोलन शुरू हुआ था। छात्र JPSC और JSSC की अलग-अलग भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच और कार्रवाई की मांग कर रहे थे। आंदोलन करीब 26 दिन तक चला।
इस दौरान 14वीं JPSC परीक्षा और दूसरी कई भर्ती परीक्षाओं को लेकर भी सवाल उठे। सरकार ने जांच और छात्रों की मांगों के बीच कई भर्ती परीक्षाओं पर कार्रवाई का फैसला लिया।
17 अगस्त 2026 को हुई विशेष कैबिनेट बैठक में सरकार ने 22 भर्ती परीक्षाओं और प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला लिया। इसके अलावा 23 अन्य परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखा गया। इस फैसले की अधिसूचना 18 अगस्त को जारी हुई थी।
रद्द की गई परीक्षाओं में 11वीं से 13वीं JPSC Civil Services भी शामिल थी। समस्या यह थी कि इन परीक्षाओं के जरिए कई अभ्यर्थियों की नियुक्ति पहले ही हो चुकी थी। सरकार के आदेश के बाद उनकी नौकरी भी खतरे में पड़ गई।
अभ्यर्थियों ने कहा, गड़बड़ी हुई है तो दोषी की पहचान हो
चयनित अभ्यर्थियों का कहना था कि परीक्षा में अगर किसी व्यक्ति ने गड़बड़ी की है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन जिन उम्मीदवारों ने मेहनत से परीक्षा पास की और नियुक्ति पाई, उनकी नौकरी सिर्फ इसलिए नहीं छीनी जानी चाहिए कि पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं।
याचिका में यह भी तर्क दिया गया कि 11वीं से 13वीं JPSC Civil Services की अंतिम मेरिट 1,050 अंकों के आधार पर बनी थी। इसमें 950 अंक मुख्य परीक्षा के और 100 अंक इंटरव्यू के थे। अभ्यर्थियों की ओर से कहा गया कि कथित गड़बड़ी के असर को अलग-अलग देखकर ही कोई कार्रवाई होनी चाहिए।
JSSC-CGL का क्या होगा?
यहां एक बात साफ समझना जरूरी है। सरकार ने JSSC-CGL समेत कुल 22 भर्ती परीक्षाओं और प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। JSSC-CGL के जरिए 1,932 उम्मीदवारों की नियुक्ति हो चुकी थी।
JSSC-CGL के चयनित अभ्यर्थियों ने भी सरकार के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। लेकिन आज 20 अगस्त को जिस आदेश की सबसे स्पष्ट जानकारी सामने आई है, वह 11वीं से 13वीं JPSC Civil Services और उनसे हुई नियुक्तियों से जुड़ा है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि आज के आदेश से सभी 22 रद्द परीक्षाएं अपने आप बहाल हो गई हैं।
अभी क्या स्थिति है?
20 अगस्त के हाईकोर्ट के आदेश के बाद 11वीं से 13वीं JPSC से नियुक्त अभ्यर्थियों की नौकरी फिलहाल सुरक्षित हो गई है। जिन कर्मचारियों को सरकार के फैसले के बाद काम से हटने की स्थिति आ गई थी, उन्हें वापस ड्यूटी शुरू करने का निर्देश दिया गया है।
लेकिन यह अंतिम फैसला नहीं है। हाईकोर्ट ने फिलहाल सरकारी आदेश पर रोक लगाई है और मामले में राज्य सरकार से जवाब मांगा है। अगली सुनवाई 25 अगस्त को होनी है।
इसका मतलब यह है कि भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच अपनी जगह चलती रहेगी और अदालत में यह मामला भी आगे बढ़ेगा। अभी के लिए इतना जरूर साफ है कि JPSC-JSSC परीक्षा रद्द मामले में हाईकोर्ट के हस्तक्षेप से 11वीं से 13वीं JPSC के 342 चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है।












