रांची: JPSC-JSSC आंदोलन 23वें दिन और तेज हो गया। रविवार को रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और RJD नेता तेजस्वी यादव के पुतले जलाकर विरोध जताया। छात्रों ने सरकार को 18 अगस्त तक का समय दिया है। मांगें पूरी नहीं होने पर 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव की चेतावनी दी गई है।
प्रदर्शनकारी JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। रविवार को जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक मशाल जुलूस निकाला गया, जहां पुतला दहन किया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के कुछ अन्य जिलों में भी पुतले जलाकर विरोध जताया गया।
JPSC-JSSC आंदोलन में पुतला दहन
रविवार को हुए प्रदर्शन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के साथ राहुल गांधी और तेजस्वी यादव के पुतले भी जलाए गए। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं को लेकर उनकी मांगों पर सरकार और राजनीतिक नेतृत्व की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
प्रदर्शनकारी बहा लिंडा ने विरोध के दौरान अपना सिर भी मुंडवाया। उन्होंने इसे राजनीतिक नेतृत्व की विफलता के खिलाफ प्रतीकात्मक विरोध बताया। हालांकि, नेताओं के खिलाफ लगाए गए आरोपों को प्रदर्शनकारियों के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
JPSC-JSSC आंदोलन की मुख्य मांगें क्या हैं?
JPSC-JSSC आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों ने सरकार के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें मुख्य रूप से:
- JSSC CGL परीक्षा रद्द करने की मांग
- JPSC 11वीं से 13वीं परीक्षा रद्द करने की मांग
- कथित परीक्षा अनियमितताओं की CBI जांच
- TDPL एजेंसी के जरिए आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने की मांग
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि इन मांगों पर 18 अगस्त तक ठोस फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन का अगला चरण शुरू किया जाएगा।
JPSC-JSSC आंदोलन में 20 अगस्त बड़ा दिन
आंदोलनकारियों ने कहा है कि अगर 18 अगस्त तक उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। प्रदर्शनकारियों के मंच JPSC-JSSC Reform Manch ने इस संबंध में चेतावनी जारी की है।
आंदोलनकारियों ने मुख्यमंत्री से मांगों पर स्पष्ट निर्णय लेने की अपील की है। उन्होंने यह भी कहा है कि मांगें नहीं मानी गईं तो मुख्यमंत्री के इस्तीफे की मांग को भी आंदोलन का हिस्सा बनाया जाएगा।
JPSC-JSSC आंदोलन के बीच सरकार ने फिर बुलाया
लगातार बढ़ते विरोध के बीच सरकार ने रविवार शाम आंदोलनकारी छात्रों को बातचीत के लिए फिर आमंत्रित किया। अधिकारियों की ओर से छात्रों और उनके कानूनी सलाहकार को सोमवार की बैठक में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया है।
यह सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच बातचीत का सातवां दौर होगा। इससे पहले 9 अगस्त को हुई बातचीत में किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन सकी थी।
सरकार की बातचीत की पेशकश ऐसे समय आई है जब प्रदर्शनकारी 20 अगस्त को बड़े आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। अब अगली बैठक में सरकार की ओर से क्या प्रस्ताव रखा जाता है और आंदोलनकारी उस पर क्या रुख अपनाते हैं, इस पर नजर रहेगी।
JPSC-JSSC आंदोलन में भूख हड़ताल भी जारी
JPSC-JSSC आंदोलन के साथ भूख हड़ताल भी जारी है। New Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारी प्रेम नायक रविवार को भूख हड़ताल के 13वें दिन पर थे। उन्होंने अपनी तबीयत बिगड़ने की बात कही और आंदोलन स्थल छोड़कर इलाज कराने से इनकार करने की बात भी कही।
आंदोलनकारियों के अनुसार, सरकार की ओर से उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। हालांकि, सरकार पहले बातचीत के जरिए समाधान निकालने की बात कह चुकी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी छात्रों की शिकायतों को बातचीत के जरिए सुलझाने और उनके साथ अन्याय नहीं होने देने की बात कही थी।
JPSC-JSSC आंदोलन में 10 अगस्त को हुआ था टकराव
इससे पहले 10 अगस्त को छात्रों ने झारखंड विधानसभा के घेराव की कोशिश की थी। स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए लाठीचार्ज, आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था। इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों के घायल होने की खबर सामने आई थी।
उस घटना के बाद आंदोलन और ज्यादा चर्चा में आ गया। इसके बाद सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के कई दौर हुए, लेकिन अभी तक आंदोलन पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
JPSC-JSSC आंदोलन अब किस दिशा में जाएगा?
फिलहाल JPSC-JSSC आंदोलन के लिए 18 और 20 अगस्त की तारीखें सबसे अहम हो गई हैं। 18 अगस्त तक सरकार से कार्रवाई की मांग की गई है। इसके बाद 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास घेराव की चेतावनी दी गई है।
दूसरी ओर, सरकार ने बातचीत का नया प्रस्ताव दिया है। ऐसे में सोमवार को होने वाली प्रस्तावित बैठक से आंदोलन की अगली दिशा कुछ हद तक साफ हो सकती है। अगर बातचीत में समाधान नहीं निकलता है तो प्रदर्शनकारी अपने घोषित अगले कदम पर आगे बढ़ सकते हैं।
अभी तक परीक्षा रद्द करने, CBI जांच और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं पर आंदोलनकारियों की मांगों को लेकर कोई अंतिम समाधान सामने नहीं आया है। इसलिए इस पूरे मामले में सरकार और छात्रों के अगले कदम पर नजर बनी हुई है।
नोट: परीक्षा में अनियमितताओं से जुड़े आरोपों को इस खबर में आरोप के रूप में ही रखा गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर इन आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना गया है।












