हजारीबाग: देश की सुरक्षा के लिए जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में शहीद हुए हजारीबाग के कैप्टन करमजीत सिंह बख्शी की शहादत को करीब डेढ़ साल बीत चुके हैं। परिवार आज भी अपने बेटे की कुर्बानी पर गर्व करता है, लेकिन कुछ सरकारी वादों के पूरा होने का इंतजार भी कर रहा है।
परिवार के मुताबिक, शहादत के बाद सरकार की ओर से पांच एकड़ जमीन, आवासीय जमीन और आर्थिक सहायता देने की बात कही गई थी। परिवार का कहना है कि लंबे समय के बाद भी इन आश्वासनों का पूरा लाभ उन्हें नहीं मिल पाया है। परिवार का कहना है कि वह अपने बेटे की शहादत को किसी मुआवजे से नहीं तौलता, लेकिन सरकार ने जो वादे किए थे, उन्हें पूरा किया जाना चाहिए।
अखनूर सेक्टर में IED विस्फोट में शहीद हुए थे कैप्टन करमजीत
कैप्टन करमजीत सिंह बख्शी 11 फरवरी 2025 को जम्मू-कश्मीर के अखनूर सेक्टर में नियंत्रण रेखा (LoC) के पास गश्त के दौरान हुए IED विस्फोट में शहीद हुए थे। वह 9 Punjab से जुड़े थे और हजारीबाग के जुलू पार्क इलाके के रहने वाले थे।
उपलब्ध सैन्य रिकॉर्ड आधारित प्रोफाइल के अनुसार, कैप्टन बख्शी 9 Punjab में अधिकारी थे और उन्होंने 2019 में भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त किया था।
उस दिन सेना की टीम अखनूर के संवेदनशील इलाके में निगरानी और गश्त कर रही थी। इसी दौरान विस्फोट हुआ। घटना में कैप्टन करमजीत सिंह बख्शी और नायक मुकेश सिंह मनहास शहीद हुए, जबकि एक अन्य सैन्यकर्मी घायल हुआ था।
शादी की तैयारियों के बीच घर पहुंची थी शहादत की खबर
कैप्टन करमजीत सिंह बख्शी के परिवार में उस समय शादी की तैयारियां चल रही थीं। उनकी शादी अप्रैल 2025 में होने वाली थी। परिवार घर की मरम्मत और अन्य तैयारियों में जुटा था, लेकिन 11 फरवरी की शाम आई खबर ने खुशियों को मातम में बदल दिया।
उनके पार्थिव शरीर को सैन्य सम्मान के साथ हजारीबाग लाया गया। अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। सेना की ओर से उन्हें अंतिम सलामी दी गई और पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
शहादत के बाद सरकार ने किए थे कई ऐलान
कैप्टन करमजीत सिंह की शहादत के बाद झारखंड सरकार की ओर से परिवार को सहयोग का भरोसा दिया गया था। फरवरी 2025 में नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार ने परिवार से मुलाकात की थी।
उस समय पैगोडा चौक का नाम कैप्टन करमजीत सिंह बख्शी के नाम पर करने और वहां सैनिक की प्रतिमा लगाने की बात कही गई थी। इसके अलावा परिवार को सरकारी प्रावधानों के तहत सुविधाएं देने और जमीन उपलब्ध कराने का आश्वासन भी सामने आया था।
पैगोडा चौक पर लगी राइफल, लेकिन उद्घाटन का इंतजार
कैप्टन करमजीत सिंह की याद में पैगोडा चौक के पास राइफल स्थापित की गई है। यह उनके सैन्य जीवन और बलिदान की याद दिलाती है।
हालांकि परिवार के अनुसार, इस स्मृति स्थल का अब तक औपचारिक उद्घाटन नहीं हुआ है। परिवार को बताया गया था कि मंत्री की मौजूदगी में इसका उद्घाटन किया जाएगा, लेकिन इंतजार अभी खत्म नहीं हुआ है।
परिवार के लिए यह सिर्फ एक स्मारक नहीं है। यह उनके बेटे की शहादत की सार्वजनिक स्मृति से जुड़ा विषय है। इसलिए परिवार चाहता है कि इससे जुड़े काम जल्द पूरे किए जाएं।
परिवार की मांग: वादे पूरे हों, शहादत का सम्मान बना रहे
कैप्टन करमजीत सिंह के माता-पिता का कहना है कि उन्हें अपने बेटे की शहादत पर गर्व है। उनका दर्द किसी आर्थिक सहायता से जुड़ा नहीं है। परिवार चाहता है कि शहादत के समय सरकार की ओर से किए गए वादों को पूरा किया जाए।
परिवार के अनुसार, पांच एकड़ जमीन, आवासीय जमीन और आर्थिक सहायता से जुड़े आश्वासन अभी भी उनकी उम्मीदों का हिस्सा हैं। साथ ही, शहीद की स्मृति में किए गए नामकरण और स्मारक से जुड़े काम भी पूरे होने चाहिए।
हजारीबाग के लिए हमेशा याद रहेंगे कैप्टन करमजीत
कैप्टन करमजीत सिंह बख्शी की शहादत ने फरवरी 2025 में पूरे हजारीबाग को झकझोर दिया था। उनकी अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए थे और शहर में उनके सम्मान में भावनात्मक माहौल देखने को मिला था।
आज उनकी शहादत को याद करते हुए परिवार के सामने दो तस्वीरें हैं। एक तरफ देश के लिए बेटे के सर्वोच्च बलिदान का गर्व है, तो दूसरी तरफ उन सरकारी घोषणाओं के पूरे होने का इंतजार है, जिनका आश्वासन शहादत के बाद दिया गया था।
कैप्टन करमजीत सिंह बख्शी की कहानी इसलिए सिर्फ एक सैनिक की शहादत की कहानी नहीं है। यह उस परिवार की कहानी भी है, जो अपने बेटे को खोने के बाद भी देश के प्रति उसके कर्तव्य पर गर्व करता है और अब चाहता है कि उसके बलिदान से जुड़े वादे भी अपनी मंजिल तक पहुंचें।
कैप्टन करमजीत सिंह बख्शी को Johar Express की ओर से विनम्र श्रद्धांजलि।







