नई दिल्ली: अरुणाचल प्रदेश में चीन का कब्जा होने की चर्चा को लेकर एक बार फिर विवाद शुरू हो गया है। Upper Subansiri जिले के Taksing इलाके को लेकर स्थानीय संगठन ने चीनी सेना PLA की गतिविधियों और कुछ इलाकों में उसकी कथित मौजूदगी को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
हालांकि, अरुणाचल प्रदेश में चीन का कब्जा होने की बात को लेकर स्थिति को स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है। चीन अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्से पर अपना दावा करता है, लेकिन पूरा अरुणाचल प्रदेश चीन के नियंत्रण में नहीं है। यहां भारत का प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था कायम है।
मामला इतना बढ़ा कि सोशल मीडिया पर यह दावा फैलने लगा कि चीन अरुणाचल प्रदेश में 60 किलोमीटर तक अंदर आ गया है और भारतीय जमीन पर कब्जा कर लिया है।
लेकिन केंद्र सरकार और भारतीय सेना ने इस दावे को खारिज किया है। केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने 19 अगस्त को कहा कि चीन के 60 किलोमीटर अंदर घुसने की बात सही नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत-चीन सीमा के कुछ हिस्सों में अभी स्पष्ट demarcation की समस्या है।
तो फिर Taksing में मामला क्या है? और लद्दाख में चीन के कब्जे की बात कितनी पुरानी है? आइए पूरा मामला आसान भाषा में समझते हैं।
Taksing में आखिर विवाद क्या है?
Taksing अरुणाचल प्रदेश के Upper Subansiri जिले का एक बेहद संवेदनशील सीमावर्ती इलाका है।
जून 2026 में Nah Welfare Society ने प्रशासन को एक memorandum देकर आरोप लगाया था कि सीमा के पास PLA की गतिविधियां बढ़ी हैं। संगठन ने दावा किया कि कुछ ऐसे इलाके, जहां स्थानीय लोग पहले चराई, शिकार और दूसरे पारंपरिक काम करते थे, वहां अब उनकी पहुंच पहले जैसी नहीं रही है।
संगठन ने Oying, Paniar, Marpan, Potrang Lake और Tindingtang जैसे इलाकों का भी जिक्र किया था। इन दावों के सामने आने के बाद अरुणाचल में सीमा सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई।
अरुणाचल प्रदेश में चीन का कब्जा लेकर भारतीय सेना ने क्या कहा?
स्थानीय संगठन के आरोपों के बाद भारतीय सेना ने 29 जून को अपना पक्ष रखा।
सेना ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी PLA की हालिया घुसपैठ और भारतीय क्षेत्र में नए camps बनाए जाने की खबरों को गलत और बिना आधार बताया। यानी अभी तक भारतीय सेना ने यह स्वीकार नहीं किया है कि चीन ने Taksing में भारतीय जमीन पर नया कब्जा किया है।
यही वजह है कि इस पूरे मामले को सीधे “चीन ने अरुणाचल पर कब्जा कर लिया” कहना सही नहीं होगा।
फिर 60 किलोमीटर वाली बात कहां से आई?
सोशल मीडिया पर पिछले कुछ समय से दावा किया जा रहा था कि चीनी सेना अरुणाचल प्रदेश में करीब 60 किलोमीटर तक अंदर आ गई है।
यह दावा तेजी से वायरल हुआ और सीमा विवाद को लेकर काफी चर्चा होने लगी। लेकिन 19 अगस्त को केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने इस दावे को साफ तौर पर खारिज किया। उन्होंने कहा कि यह कहना गलत है कि चीन अरुणाचल प्रदेश में 60 किलोमीटर अंदर घुस आया है।
उन्होंने यह भी माना कि सीमा के कुछ हिस्सों में demarcation का मुद्दा है। यानी जमीन पर भारत और चीन की सीमा हर जगह स्पष्ट रूप से चिन्हित नहीं है।
क्या Taksing में कोई चिंता नहीं है?
ऐसा भी नहीं है। कि स्थानीय लोगों और संगठनों की ओर से उठाए गए सवालों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। Taksing जैसे बेहद दूर और संवेदनशील इलाके में स्थानीय लोगों की जमीन, पारंपरिक रास्तों और patrolling को लेकर चिंता सामने आई है।
इसी वजह से इस मामले में अलग-अलग दावों की जांच जरूरी है। इसलिए जुलाई में अरुणाचल प्रदेश के Home Minister Mama Natung ने भी Taksing में चीनी कब्जे की खबरों को खारिज करते हुए इन्हें अफवाह बताया था।
इस समय स्थिति यही है कि स्थानीय संगठन आरोप लगा रहे हैं, जबकि सेना और राज्य सरकार हालिया चीनी कब्जे की बात को नकार रही हैं।
अब लद्दाख की बात
लद्दाख में मामला अरुणाचल से अलग है। भारत सरकार के आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक Aksai Chin में करीब 38,000 वर्ग किलोमीटर भारतीय क्षेत्र 1962 के युद्ध के बाद से चीन के नियंत्रण में है।

इसके अलावा भारत सरकार के अनुसार 1963 में पाकिस्तान ने Pakistan-occupied Kashmir के करीब 5,180 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को चीन को सौंप दिया था। भारत इस व्यवस्था को मान्यता नहीं देता। इसलिए लद्दाख में चीन के नियंत्रण वाले भारतीय दावे के क्षेत्र की बात कोई नई घटना नहीं है।
क्या 2026 में चीन ने लद्दाख में नया कब्जा किया?
ऐसा दावा करने के लिए फिलहाल पर्याप्त आधिकारिक प्रमाण नहीं है। लद्दाख में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद पुराना है। 2020 के बाद पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों की सेनाओं के बीच तनाव काफी बढ़ गया था। इसके बाद कई दौर की बातचीत और disengagement की प्रक्रिया चली।
भारत सरकार ने फरवरी 2025 में कहा था कि 2020 के बाद प्रभावित हुई traditional patrolling व्यवस्था को हालिया disengagement के बाद फिर से बहाल किया गया है। इसलिए पुराने चीनी नियंत्रण वाले क्षेत्र और 2026 में हुए कथित नए कब्जे को एक ही बात मानना सही नहीं होगा।
अरुणाचल पर चीन का दावा कितना बड़ा है?
अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन का दावा बहुत बड़ा है। कि भारत सरकार के पुराने आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार चीन अरुणाचल प्रदेश के करीब 90,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर दावा करता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि चीन उस पूरे इलाके पर प्रशासन चला रहा है।
- अरुणाचल प्रदेश भारत के प्रशासन और नियंत्रण में है।
- भारत लगातार चीन के इस दावे को खारिज करता रहा है।
- यहीं पर एक जरूरी अंतर समझना चाहिए।
किसी इलाके पर दावा करना और उस इलाके पर वास्तविक नियंत्रण रखना दो अलग-अलग बातें हैं।
फिर असली चिंता क्या है?
इस पूरे विवाद में सबसे बड़ा सवाल सिर्फ जमीन का नहीं, बल्कि सीमा पर patrolling और ground access का भी है। अगर किसी इलाके में भारतीय सुरक्षा बलों की patrolling को लेकर समस्या आती है या स्थानीय लोगों को अपने पारंपरिक इलाकों तक पहुंचने में परेशानी होती है, तो वह सुरक्षा के लिहाज से गंभीर विषय है। लेकिन किसी दावे को “चीनी कब्जा” कहने से पहले जमीन पर वास्तविक स्थिति, सैन्य रिकॉर्ड और सरकारी जांच को देखना जरूरी है।
चीन के कब्जे पर अभी क्या सच है?
पूरे मामले को तीन हिस्सों में समझना आसान होगा।
पहली बात: लद्दाख के Aksai Chin में भारत के दावे वाला करीब 38,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र लंबे समय से चीन के नियंत्रण में है। यह 2026 में हुआ नया कब्जा नहीं है।
दूसरी बात: चीन अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्से पर दावा करता है, लेकिन पूरा अरुणाचल चीन के कब्जे में नहीं है। भारत वहां प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था चला रहा है।
तीसरी और सबसे ताजा बात: Taksing इलाके को लेकर स्थानीय संगठन ने PLA की गतिविधियों और जमीन तक पहुंच को लेकर सवाल उठाए हैं, लेकिन भारतीय सेना ने हालिया चीनी घुसपैठ और camps बनाए जाने की खबरों को गलत बताया है।









