ABVP से शिक्षा मंत्री तक… कौन हैं धर्मेंद्र प्रधान, जिनके इस्तीफे ने मचाई सियासी हलचल?
नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। NEET-UG परीक्षा विवाद, देशभर में छात्रों के विरोध प्रदर्शन और बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच आया यह फैसला राष्ट्रीय राजनीति की बड़ी घटनाओं में शामिल हो गया है। उनके इस्तीफे के बाद एक बार फिर उनकी राजनीतिक यात्रा चर्चा का विषय बन गई है।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर
धर्मेंद्र प्रधान का जन्म 26 जून 1969 को ओडिशा के तालचेर में हुआ। उनके पिता देबेंद्र प्रधान भी भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रहे हैं। राजनीतिक माहौल में पले-बढ़े धर्मेंद्र प्रधान ने अपने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से की।
वे वर्ष 1983 में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े। इसके बाद तालचेर कॉलेज छात्रसंघ के अध्यक्ष बने और 1995 में ABVP के राष्ट्रीय सचिव नियुक्त किए गए। छात्र राजनीति में उनकी सक्रियता और संगठन क्षमता ने उन्हें भाजपा के युवा नेतृत्व में पहचान दिलाई।
भाजपा में लगातार बढ़ता कद
ABVP से निकलकर धर्मेंद्र प्रधान भारतीय जनता युवा मोर्चा (BJYM) में सक्रिय हुए। वर्ष 2000 में उन्होंने ओडिशा की पल्लाहारा विधानसभा सीट से चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने। इसके बाद 2004 में लोकसभा पहुंचे और धीरे-धीरे भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने लगे।
उन्होंने पार्टी संगठन में उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, कर्नाटक और उत्तराखंड सहित कई राज्यों के चुनाव प्रभारी और संगठनात्मक जिम्मेदारियां भी संभालीं।
मोदी सरकार में कई अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी
2014 में नरेंद्र मोदी सरकार बनने के बाद धर्मेंद्र प्रधान को पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। उनके कार्यकाल में प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना को देशभर में व्यापक स्तर पर लागू किया गया।
इसके अलावा उन्होंने इस्पात मंत्रालय और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय का भी नेतृत्व किया। जुलाई 2021 में उन्हें देश का शिक्षा मंत्री बनाया गया।
शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यकाल
शिक्षा मंत्री रहते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने नई शिक्षा नीति (NEP) के क्रियान्वयन, डिजिटल शिक्षा, कौशल विकास और उच्च शिक्षा में कई सुधारों पर काम किया। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की परीक्षा व्यवस्था में बदलाव और प्रवेश परीक्षाओं में सुधार की दिशा में भी कई कदम उठाए गए।
हालांकि उनके कार्यकाल में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे और NEET परीक्षा से जुड़े विवादों ने सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया।
NEET विवाद और बढ़ता दबाव
NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के आरोपों के बाद देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ। दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई शहरों में हजारों छात्र सड़कों पर उतर आए और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग तेज हो गई।
जांच एजेंसियों ने मामले की जांच शुरू की, जबकि विपक्ष ने संसद से लेकर सड़क तक सरकार को घेरा। लगातार बढ़ते जनदबाव और राजनीतिक विवाद के बीच धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा सौंप दिया।
एक नजर में धर्मेंद्र प्रधान
- पूरा नाम: धर्मेंद्र प्रधान
- जन्म: 26 जून 1969, तालचेर (ओडिशा)
- राजनीतिक दल: भारतीय जनता पार्टी (BJP)
- शिक्षा: उत्कल विश्वविद्यालय से स्नातकोत्तर
- राजनीतिक शुरुआत: ABVP से छात्र राजनीति
- पहला चुनाव: पल्लाहारा विधानसभा (2000)
- पूर्व मंत्रालय: पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, इस्पात, कौशल विकास एवं उद्यमिता
- पूर्व पद: केंद्रीय शिक्षा मंत्री
- वर्तमान संसदीय क्षेत्र: संबलपुर, ओडिशा
आगे क्या?
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल एक मंत्री का पद छोड़ना नहीं, बल्कि देश की परीक्षा व्यवस्था और शिक्षा प्रणाली को लेकर उठे सवालों का राजनीतिक प्रभाव भी माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि केंद्र सरकार शिक्षा मंत्रालय में आगे क्या बदलाव करती है और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कौन से नए कदम उठाए जाते हैं।

