भारत में डिग्री हासिल करने के बाद नौकरी मिलना ही अब सबसे बड़ी चुनौती नहीं है, बल्कि पढ़ाई और नौकरी के बीच सही तालमेल भी एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। NITI Aayog Report में सामने आया है कि केवल 8.25% ग्रेजुएट्स ऐसे रोजगार में हैं, जो उनकी qualification के अनुरूप हैं। यह आंकड़ा रिपोर्ट में Economic Survey 2024-25 के हवाले से दिया गया है।
NITI Aayog ने 18 अगस्त 2026 को “Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047” रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट का उद्देश्य भारत की skilling व्यवस्था को इस तरह बदलने का रास्ता सुझाना है, जिससे शिक्षा, skill development और रोजगार के बीच बेहतर संबंध बनाया जा सके।
8.25% का आंकड़ा आखिर बताता क्या है?
सबसे पहले इस आंकड़े को सही तरीके से समझना जरूरी है। 8.25% का मतलब यह नहीं है कि भारत के केवल 8.25% graduates को नौकरी मिली है।
रिपोर्ट में बात उन graduates की हो रही है जो अपनी qualification के अनुरूप roles में employed हैं। यानी किसी व्यक्ति के पास graduate-level qualification है, लेकिन उसका काम उस qualification के स्तर या nature से मेल नहीं खाता, तो वह qualification-aligned employment की इस श्रेणी में नहीं आता। इसलिए 91.75% graduates को बेरोजगार बताना इस रिपोर्ट की सही व्याख्या नहीं होगी।
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शिक्षा और नौकरी के बीच क्यों बढ़ रहा है mismatch?
NITI Aayog के मुताबिक भारत के learning और delivery models अभी भी काफी हद तक theoretical हैं। विद्यार्थियों को practical exposure, workplace experience, proof of work और job-readiness support पर्याप्त रूप से नहीं मिल पाता।
रिपोर्ट यह भी बताती है कि कई skilling programmes स्थानीय industry demand से पर्याप्त रूप से जुड़े नहीं हैं। नतीजा यह होता है कि training हासिल करने के बाद भी कई learners को अपने क्षेत्र में अपनी skills के अनुरूप रोजगार नहीं मिल पाता।
इस समस्या का असर higher education तक भी दिखाई देता है। Degree हासिल करने के बावजूद communication, applied problem-solving, digital skills और role-specific competencies जैसी practical क्षमताओं की कमी रोजगार में बाधा बन सकती है।
सिर्फ डिग्री से आगे बढ़कर skill पर जोर
NITI Aayog ने अपनी रिपोर्ट में education और skilling को अलग-अलग व्यवस्था के बजाय एक connected pathway के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया है।
रिपोर्ट के अनुसार Grade 6 से General Employability and Entrepreneurship Skills (GEES) शुरू की जा सकती हैं। इनमें communication, functional English, digital basics, financial literacy, teamwork, problem-solving और entrepreneurship जैसी क्षमताएं शामिल होंगी।
Grade 9 से vocational pathways को मजबूत करने का सुझाव दिया गया है। वहीं senior secondary और higher education के स्तर पर vocational education, apprenticeships और industry-linked learning को अधिक महत्व देने की बात कही गई है।
Apprenticeship और industry connection पर जोर
रिपोर्ट में ITIs और polytechnics को industry partnerships और Public-Private Partnership यानी PPP मॉडल से मजबूत करने का सुझाव दिया गया है।
इसका उद्देश्य केवल certificate देना नहीं, बल्कि training को वास्तविक workplace और employment outcomes से जोड़ना है। रिपोर्ट में apprenticeship pathways को मजबूत करने और industry-recognised तथा education board-recognised dual certification जैसे विकल्पों पर भी जोर दिया गया है।
National Credit Framework भी महत्वपूर्ण
NITI Aayog ने National Credit Framework (NCrF) के बेहतर implementation की जरूरत भी बताई है। इसका उद्देश्य academic education, vocational training और workplace learning के बीच credits और qualifications की portability को आसान बनाना है।
रिपोर्ट के प्रस्तावित model में विद्यार्थी education, skilling और employment के बीच जरूरत के अनुसार आगे-पीछे जा सकेगा। यानी career path केवल एक सीधी लाइन नहीं होगा।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह रिपोर्ट?
भारत की युवा आबादी को economic growth के लिए बड़ी ताकत माना जाता है। लेकिन यह demographic advantage तभी रोजगार और productivity में बदल सकता है, जब युवाओं की education और skills की जरूरत labour market से जुड़ी हो।
NITI Aayog की रिपोर्ट के मुताबिक 2014-15 से अब तक 7.67 करोड़ से अधिक लोगों को skilling programmes के माध्यम से train किया गया है। FY 2025-26 में Central Ministries की skilling-related expenditure के लिए कुल करीब ₹34,000 करोड़ का allocation भी बताया गया है।
इसके बावजूद report का निष्कर्ष है कि केवल training की संख्या बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। असली सफलता यह देखना होगा कि training के बाद employment, income, career progression और sustainable livelihood में कितना सुधार आया।
NITI Aayog Report में बड़ा संदेश
रिपोर्ट का मूल संदेश यही है कि भारत को ऐसी education और skilling व्यवस्था की जरूरत है जिसमें degree के साथ employability और practical skills भी विकसित हों।
NITI Aayog ने अपने proposed skilling architecture को तीन प्रमुख सिद्धांतों पर आधारित बताया है: learning pathways का non-linear होना, skilling को lifelong process के रूप में देखना और participation की जगह employment, progression तथा livelihood जैसे outcomes को सफलता का मुख्य पैमाना बनाना।
इस लिहाज से 8.25% का आंकड़ा केवल graduates की समस्या नहीं दिखाता, बल्कि यह सवाल भी उठाता है कि भारत की higher education system और job market के बीच दूरी कितनी है और उसे कैसे कम किया जाए।








